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शिव के हर भक्त को पता होनी चाहिए अमरनाथ गुफा से जुड़ी हुई ये 6 रहस्यमयी बातें ..

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अमरनाथ गुफा के रहस्यमयी बातें:

हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन कुछ देवी-देवताओं की सबसे ज़्यादा पूजा की जाती है। केवल यही नहीं कुछ देवी-देवताओं के स्थान में सबसे ज़्यादा होते हैं। इन्ही में से एक प्रमुख हिंदू देवता है भगवान शिव। आपको बता दें भारत के लगभग हर क्षेत्र की गली-गली में भगवान शिव के मंदिर स्थित है, इसके साथ ही कुछ बहुत प्राचीन तीर्थस्थल भी मौजूद हैं। भगवान शिव के इन तीर्थस्थलों में कई रहस्य भी छुपे हुए हैं, जिसके बारे में बहुत काम लोगों की ही जानकारी है।

अमरनाथ गुफा है भगवान शिव की ख़ास जगहों में से एक

हिंदुओं के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक

अमरनाथ गुफा के बारे में किसी को कुछ भी बताने की ज़रूरत नहीं है। हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह अपने जीवन में काम से काम एक बार अमरनाथ यात्रा पर जा सके। इसे भगवान शिव की सबसे ख़ास जगहों में से एक माना जाता है। प्राचीनकाल में इसे अमरेश्वर के नाम से जाना जाता था। अमरनाथ गुफा के बारे में कुछ ऐसी भी बातें हैं, जिनके बारे में बहुत काम लोग ही जानते हैं। जैसे अमरनाथ गुफा की खोज किसने की थी? इस सवाल का जवाब भी बहुत काम लोगों को पता है। आज हम आपको अमरनाथ गुफा से जुड़ी हुई ऐसी ही 6 बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।

जानिए अमरनाथ गुफा के रहस्यमयी बातें:
*- इन्होंने की थी अमरनाथ गुफा की खोज:

ऐसा माना जाता है कि इस गुफा के बारे में

सबसे पहले बूटा मलिक नाम के एक व्यक्ति को पता लगा था। एक दिन बूटा भेड़ चराते हुए बहुत दूर निकल गया था। जंगल में पहुँचने के बाद बूटा की मुलाक़ात एक साधु से हुई। साधु ने बूटा को कोयले से भरी हुई एक कांगड़ी दे दी। जब वह घर पहुँचा तो उसने देखा कि कोयले की जगह पूरा सोना था। यह देखकर वह बहुत हैरान हुआ और साधु का धन्यवाद करने के लिए पुनः जंगल में गया लेकिन वाहन साधु नहीं मिला। साधु की जगह उसे एक विशाल गुफा दिखाई दी। उसी दिन से वह गुफा तीर्थस्थल बन गया।

*- भगवान शिव ने पार्वती जी को सुनाया था अमरत्व का मंत्र:

इस गुफा के बारे में कहा जाता है कि यह

केवल इसलिए प्रसिद्ध नहीं है कि यहाँ पर बर्फ़ का शिवलिंग बनता है बल्कि इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि इसी गुफा के अंदर भगवान शिव ने देवी पार्वती को अमरत्व का मंत्र सुनाया था।

*- अमरत्व मंत्र सुनाने से पहले छोड़ दिया था सभी का साथ:

मान्यता है कि कोई और भी अमरत्व के मंत्र का

ना सुन ले इसलिए भगवान शिव ने देवी पार्वती को अमरत्व मंत्र सुनाने से पहले ही सभी का साथ छोड़ दिया था। जब भगवान शिव देवी पार्वती को अमरत्व मंत्र सुनाने के लिए ले जा रहे थे तो उन्होंने सबसे पहले पहलगाम में अपनी सवारी नंदी का त्याग किया था। इसके बाद आगे चंदनबाड़ी में जटा से चंद्रमा का त्याग कर दिया। शेषनाग झील के पास पहुँचकर गले से साँपो को निकाल दिया। महागुणस पर्वत पर उन्होंने भगवान गणेश को छोड़ देने का निर्णय किया। अंत में पंचतरणी नामक जगह पर पहुँचने के बाद भगवान शिव ने पाँचों तत्वों का भी परित्याग कर दिया था।

*- देवी पार्वती के अलावा किसी और ने भी सुन ली थी अमरत्व की कथा:

शास्त्रों में यह वर्णित है कि जब भगवान शिव

देवी पार्वती को अमरत्व मंत्र सुना रहे थे तो उनके अलावा एक तोते और दो कबूतरों ने भी सुन लिया था। बाद में यही तोता शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हुए। अमरनाथ गुफा के अंदर आज भी कई श्रद्धालुओं को कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई देता है, जिसे अमर पक्षी माना जाता है।

*- शिवलिंग का रहस्य है बहुत ही अद्भुत: अमरनाथ गुफा के रहस्यमयी बातें

अमरनाथ गुफा के अंदर

जो बर्फ़ का शिवलिंग बनता है,म वह पक्के बर्फ़ का बनता है, जबकि जबकि गुफा के बाहर मिलों तक सिर्फ़ कच्ची बर्फ़ ही देखने को मिलती है। चरो तरफ़ कच्ची बर्फ़ होने का बाद भी गुफा कि अंदर कैसे पक्के बर्फ़ का शिवलिंग बनता है, यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है।

*- यहीं पर गिरा था देवी सती का कंठ: अमरनाथ गुफा के रहस्यमयी बातें

अमरनाथ गुफा के अंदर देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ स्थित है। मान्यता के अनुसार यहीं पर देवी सती का कंठ गिरा था। यहीं पर देवी सती को महामाया और भगवान शिव को त्रिसंध्येश्वर नाम से जाना जाता है।

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